द डिफरेंट स्ट्रोकस.. 01

11:41 AM Posted by विजेंद्र एस विज


तुम,
बस दूर खडे
एक मूक दर्शक की भाँति
आवाक देखते रहे...

और,
मुझे...उन चन्द
आडी-तिरछी लकीरो ने
असहाय बना दिया....

तुम!!!
चाहते तो रंगो की एक दीवार
खडी कर सकते थे.....

1 comments:

  1. neelam said...

    Bahut khoob likhtey ho. Different strokes padhte samaya tumhari kriti an-untitiled nazar aayi.
    take care
    neelam