समय निकाल सके तो जरुर आऐगे जी। वैसे विजेन्द्र जी आपके ब्लोग का टेम्पलेट सिम्पल सा बहुत सुन्दर लग रहा है। हमारे को भी कुछ सुन्दर सा बनाने के लिए कुछ टिप्स दे दीजिए ना। और हाँ मौका मिले तो कुछ खाली पड़ॆ पेज को भर दीजिए। जैसे पीछे एक पोस्ट की थी।
नई दिल्ली, इलाहाबाद, फतेहपुर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, India
"वास्तव मे कला मन की वह अभिव्यक्ती है जिससे यथार्थ की धारा फूटती है, इस अभिव्यक्ती के अलग अलग माध्यम हैं, कला एक ओर सौन्दर्य का आयाम है, वही दूसरी तरफ चेतावनी का भी...वह सहज
ढंग से मन पर अपना असर छोड जाती है साहित्यकार समाज को शब्दो मे व्यक्त
करता है और रंगो को कलाकार कल्पना और यथार्थ का सृजनात्मक रुप देकर बहुत कुछ अनकहा कहकर हमे आगाह कर देता है..."
10:44 PM
समय निकाल सके तो जरुर आऐगे जी। वैसे विजेन्द्र जी आपके ब्लोग का टेम्पलेट सिम्पल सा बहुत सुन्दर लग रहा है। हमारे को भी कुछ सुन्दर सा बनाने के लिए कुछ टिप्स दे दीजिए ना। और हाँ मौका मिले तो कुछ खाली पड़ॆ पेज को भर दीजिए। जैसे पीछे एक पोस्ट की थी।